Thursday, 5 July 2018

जानिए रामायण में कैकई ने राम के लिए 14 वर्ष का वनवास ही क्यों मांगा

ram banwas story

जानिए रामायण में कैकई ने राम के लिए 14 वर्ष का वनवास ही क्यों मांगा


आप सभी ने रामायण मे देखा है कि श्री रामचंद्र ने अपने पिता के वचन की लाज रखने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था. वह राजसी सुख छोड़कर 14 वर्ष के लिए जंगलों में एक बनवासी की तरह रहे. उन्होंने हमारे समाज को यह संदेश दिया है कि माता-पिता की आज्ञा से बढ़कर कुछ भी नहीं है.

अब सवाल यह उठता है कि कई कैकई ने राम के लिए 14 वर्ष का वनवास ही क्यों मांगा. यदि वह चाहती तो आजीवन वनवास के लिए गए भी मांग रख सकती थी. यदि हम राजनीति के अनुसार देखें तो हमें ठीक से पता चलेगा कि राम के लिए 14 वर्ष का वनवास राम को राजा बनने के अधिकार को समाप्त करना था. पुराने समय में यह कानून था कि यदि कोई राजा 14 वर्ष तक अपनी संपत्ति से दूर रहता है तो वह दोबारा से संपत्ति पर मालिकाना हक प्राप्त नहीं कर सकता है. कैकई ने भी यह सोचकर राम के लिए ही 14 वर्ष का वनवास मांगा था. ताकि राम के राजा बनने का अधिकार हमेशा के लिए चला जाए. वह बात अलग है कि भरत ने राजा बनने से इंकार कर दिया और उसने अपने बड़े भाई श्री रामचंद्र को ही 14 वर्ष बाद राज गद्दी पर बैठाया.

द्वापर युग में भी दुर्योधन ने पांडवों को राजगद्दी के अधिकार से हटाने के लिए 13 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास तय किया था. ताकि पांडव अपने राजा होने का अधिकार ना मांग सके. यदि आप आज के कानून के हिसाब से भी चलें तो आज भी यदि कोई व्यक्ति 12 साल तक अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं जताता है अथवा संपत्ति से 12 साल के लिए दूर चला जाता है तो वह अपनी संपत्ति पर 12 साल के बाद मालिकाना अधिकार खो बैठता है.

दोस्तों अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें. कमेंट करके बतायें आपको यह जानकारी कैसी लगी. 

No comments:

Post a Comment

Buy Advance Excel Course

📢 Excel कोर्स खरीदने के लिए नीचे दिए गए QR कोड को स्कैन करें और ₹999/- की पेमेंट करें। फिर उसका स्क्रीनशॉट 8851471386 नंबर पर व्हाट्सएप करे...